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रविवार, 1 मई 2022

मैं ने देखा, एक बूँद -अज्ञेय

 मैं ने देखा

एक बूँद सहसा
उछली सागर के झाग से
रँग गई क्षण भर
ढलते सूरज की आग से।

मुझको दीख गया :
सूने विराट् के सम्मुख
हर आलोक-छुआ अपनापन
है उन्मोचन
नश्वरता के दाग से!

कठिन शब्द 

सहसा- अचानक 
विराट् - (तत्सम, विशेषण, संज्ञा) - बहुत बड़ा, ब्रह्म
उन्मोचन - (तत्सम) - मुक्ति, आजादी 
नश्वरता - (तत्सम) - नाश होने की प्रवृत्ति, नष्ट हो जाने का गुण 

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